परंपरागत कृषि विकास योजना | PKVY Organic farming 

परंपरागत कृषि विकास योजना | Organic farming scheme | खेती प्रमाण सर्टिफिकेट | Organic farming Certificate |  परंपरागत कृषि विकास योजना हिंदी में | paramparagat krishi vikas yojana pib

Paramparagat Krishi Vikas Yojana | परंपरागत कृषि विकास योजना

परंपरागत कृषि विकास योजना

मित्रों आज हम आपको कृषि मंत्रालय की परंपरागत कृषि विकास योजना की जानकारी देने जा रहे हैं. इस योजना के द्वारा सरकार का जीरो बजट खेती और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने का प्रयास है| साथियों जैसा की आप सब जानते हैं कि मोदी सरकार देश के किसानों की दशा सुधारने के लिए शुरू से ही प्रयासरत रही है. आए दिन मोदी सरकार किसानों के लिए कोई ना कोई नई योजना लेकर आ रही है. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की है. इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रति हेक्टेयर ₹50000 मिलेंगे.

PKVY Scheme

 5 जुलाई 2019 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीरो बजट खेती का ऐलान किया था. मित्रों जीरो बजट खेती में खेती के लिए हर प्रकार की आवश्यकता का इंतजाम प्राकृतिक रूप से किया जाता है. इसलिए यह प्राकृतिक खेती भी हुई जिसे हम परंपरागत कृषि भी कह सकते हैं. परंपरागत खेती का भारत में प्राचीन समय से चल रहा है रहा है.  आधुनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से पहले भारत में परंपरागत कृषि और जैविक कृषि का चलन रहा है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की गई है. आप किस प्रकार से इस योजना का लाभ ले सकते हैं यह जानने के लिए पूरा आर्टिकल ध्यानपूर्वक पढ़ें. 

क्या है परंपरागत कृषि विकास योजना 

परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने देश में जैविक खेती को प्रमोट करने के लिए की है. इस योजना के अंतर्गत जैविक खेती करने वाले किसान को 3 वर्ष के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर ₹50000 की सहायता देगी. PKVY द्वारा सरकार का प्रयास है कि देश में जैविक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए. जिससे कम लागत में किसान खेती कर पाएंगे.

परंपरागत कृषि विकास योजना

परंपरागत कृषि विकास स्कीम के अंतर्गत सरकार जैविक कीटनाशकों वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद आदि खरीदने के लिए किसानों को ₹31000 देती है. पिछले कुछ समय में खेती के लिए रसायनिक खादों का उपयोग अत्यधिक बढ़ गया है. जिससे मिट्टी की प्राकृतिक प्रवक्ता कम होती जा रही है. ऐसे में परंपरागत कृषि विकास योजना से किसानों को जैविक खेती करने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा. जिससे खेती के लिए जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट और जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी. 

परंपरागत कृषि विकास योजना की विशेषताएं

  • PKVY स्कीम की शुरुआत सरकार ने देश में जैविक खेती और जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए की है .
  • Paramparagat Krishi Vikas Yojana के अंतर्गत ऑर्गेनिक फार्मिंग को क्लस्टर पेटर्न द्वारा और पीजीएस प्रमाणीकरण द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है.
  • योजना के क्रियान्वयन के लिए 50 या उससे अधिक ऐसे किसानों का एक क्लस्टर बनाया जाएगा जिनके पास 50 एकड़ भूमि होगी.
  • PKVY  के अंतर्गत 10000 क्लस्टर बनाए जाएंगे जो पूरे देश में 5 लाख एकड़ भूमि कवर करेंगे.
  • जैविकता प्रमाणीकरण के लिए किसानों पर किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं होगा.
  • फसलों के बीज और पैदावार को बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक किसान को 3 वर्ष में ₹20000 प्रति एकड़ दिए जाएंगे
  • परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत प्रत्येक क्लस्टर को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी.
  • सरकार एक क्लस्टर पर 14.35  लाख रुपए खर्च करेगी.
  • PKVY के अंतर्गत पहले वर्ष में एक क्लस्टर को 6.80  लाख रुपए, दूसरे वर्ष4.81 लाख रुपए और तीसरे वर्ष 2.72 लाख रुपए की मदद दी जाएगी.

PKVY  का लाभ और उद्देश्य

  • Paramparagat Krishi Vikas Yojana का मुख्य उद्देश्य देश में जैविक  खेती तथा जैविक उत्पादों को बढ़ावा देना है.
  • इस योजना से  वाणिज्यिक अर्थात कमाई वाले जैविक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
  • क्योंकि जैविक खेती में कीटनाशक मुक्त खेती होती है या फिर कीटनाशक भी जैविक ही होते हैं इसलिए इस योजना से उपभोक्ता के अच्छे सेहत और स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा.
  • परंपरागत कृषि विकास योजना से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी.

pkvy

  • PKVY द्वारा किसान  उत्पादन लागत के लिए प्राकृतिक संसाधन जुटाने के लिए प्रेरित होंगे.
  • Paramparagat Krishi Vikas Yojana मृदा स्वास्थ्य एवं जैविक पदार्थ सामग्री में सुधार लाएगा.
  • इस योजना से जैविक उत्पादों को बाजार के साथ जोड़ा जाएगा.

Paramparagat Krishi Vikas Yojana

मित्रों ऐसा नहीं है कि भारत के लिए जैविक खेती  कोई नई बात है.भारत में शुरू से ही परंपरागत तरीके से  जैविक खेती की जाती है. 2013 के एक अध्ययन के अनुसार विश्व में जितनी जैविक खेती की जाती है उसका लगभग 80% भारत में है. यह भी सत्य है कि पिछले कुछ समय में रसायनिक खादों पर निर्भरता पहले से अधिक बढ़ गई है. जिससे  भूमि की उर्वरता में कमी आई है.

रसायनिक खेती में कहीं प्रकार के कीटनाशकों का प्रयोग फसलों पर किया जाता है. जो सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है. इसलिए यह और भी आवश्यक हो जाता है कि जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए और अधिक से अधिक जैविक उत्पाद बाजार तक पहुंचाया जाए. इसीलिए आने वाला समय में जैविक खेती और जैविक उत्पादों में बहुत अधिक वृद्धि आने वाली है. भारत इस नई जैविक क्रांति का केंद्र बने यही देखते हुए सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की है.योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए यहां यहां क्लिक करें

जैविक खेती का सर्टिफिकेट कैसे लें | Organic farming certificate

जैविक खेती यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग सर्टिफिकेट लेने के लिए आपको आवेदन करना होगा. Organic farming certificate प्राप्त करने से पहले आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप खेती में बीज मिट्टी खाद सिंचाई कीटनाशक कटाई पैकिंग और भंडारण तक केवल जैविक सामग्री प्रयोग में लाएंगे. आपने केवल जैविक सामग्री का ही  इस्तेमाल किया है यह दर्शाने के लिए आपको सामग्री का रिकॉर्ड रखना होगा. इस रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. एपीडा द्वारा ऑर्गेनिक फूड की सैंपलिंग और एनालिसिस के लिए 19 एजेंसियों को मान्यता दी है. यह सब औपचारिकताएं पूरी होने पर ही आप अपने उत्पाद को जैविक उत्पाद के टैग के साथ भेज सकते हैं. 

Also Read:पोस्ट ऑफिस फ्रेंचाइजी स्कीम

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *